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मैं और वो


जाने से पहले काम एक बस
करना चाहे मेरा मन |
प्रश्न चिन्ह जो सामने
खड़े हुए हैं मेरे 'तन' ||


उन्हें तपाकर आग में 
और पिघलाकर धर दूं |
सीधा ऊपर से नीचे तक
खड़ी पाई कर दूं ||



खड़ी पाई के पीछे दुनिया
पड़ी हुई है लट्ठ ले लेकर |
सभी अपने साथ उसे
ले जाते हैं धक्का दे देकर ||


इस चक्कर में मुड़ - तुड़ गयी
खड़ी पाई बेचारी |
प्रश्न चिन्हों के नव निर्माण में
लगी हुई है दुनिया सारी ||


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जनवरी 1996
राकेश कुमार त्रिपाठी




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