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मेरी मौत

उन्होंने धमकाया है
कि ख़त्म कर देंगे मुझे |
मेरे मुँह में डालेंगे
दहकते हुए अंगारे,
कस देंगे मेरे हाथ - पाँव
लोहे की जंजीरों से,
फ़िर फोड़ेंगे मेरी आँखें
और कानों में डालेंगे
पिघला हुआ शीशा |
मेरी बोटी - बोटी
खिला देंगे चील - कौवों को |
पर
मैं मरूँगा नहीं
क्योंकि मैंने अपनी कलम से
कागज़ के सीने पर
खींच दी हैं,
कुछ लकीरें
और तुम इन्हें
देखकर, पढ़कर
समझने की कोशिश कर रहे हो |




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जनवरी, 1997
राकेश कुमार त्रिपाठी




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